बखत पलटों मारेला... सेवन्त्रीसिंह देवड़ा 6:11 PM Add Comment Edit बखत पलटों मारेला राजतंत्र फाजों आवेंला घणों हों गयों अधर्म अबैं धर्म आवेंला घणों हों गयों अंधारों अबैं उजाळों वेवेंला बखत पल... Read More
वे बेडु री पड़ेरिया कठै... सेवन्त्रीसिंह देवड़ा 1:11 PM Add Comment Edit ~~~~~~~~~~~~~~ वे बेडु री पड़ेरिया कठै... जीणरे माथे घड़ा धरता.. वे घरा री पोलो कठै.. जीणमेँ दाता सा बिराजता.. वे भीत री खुँटिया कठै.... Read More
हौसला हो बुलंद Unknown 3:31 PM Add Comment Edit जैसे सर पे श्री महाराणा जी का हाथ हो जैसे संस्कारो के लिए मरमिटने का जज़्बात हो जैसे आँखों में अपनों की चिंता की चिंगारी भड़के जैसे ... Read More
"राजपुताना का कर्ज" Unknown 3:23 PM Add Comment Edit "राजपुताना का कर्ज" जिनकी रगोँ मे दौड रहा है, लहु अरुण राजपुताना का, हिलोरे लेता शौर्य दिलोँ मे, पराक्रम जिनका महाराणा स... Read More
हळदीघाटी कन्हैया लाल सेठिया Unknown 1:41 PM Add Comment Edit कोनी कोरो नांव रेत रो हळदीघाटी, अठै उग्यो इतिहास पुजीजै इण री माटी, कण-कण घण अणमोल रगत स्यूं अंतस भीज्यो। नहीं निछतरी भोम गिगन रो ... Read More
पातल’र पीथल / कन्हैया लाल सेठिया Unknown 1:39 PM Add Comment Edit अरे घास री रोटी ही जद बन बिलावड़ो ले भाग्यो। नान्हो सो अमरयो चीख पड्यो राणा रो सोयो दुख जाग्यो। हूं लड्यो घणो हूं सह्यो घणो मेवाड़ी... Read More
जरा संभल क्षत्रिय तू. ............। Unknown 11:19 PM 1 Comment Edit जरा संभल क्षत्रिय तू. ............। इस सूर्य के तेज का अंस है क्षत्रिय तू श्री राम और कृष्ण का वंश है क्षत्रिय तू तेज तलवार की धार का पर... Read More
!!"क्षत्रिय है हम"!! Unknown 11:12 PM Add Comment Edit !!"क्षत्रिय है हम"!! कहते तो हम सब है की राजपूत है हम , मानवता की लाज बचाने वाले हिन्द के वो सपूत है हम । पर वो क्षत्रियोचित सँस... Read More
क्षत्रिय हुँ, रुक नहीँ सकता Unknown 11:02 PM Add Comment Edit क्षत्रिय हुँ, रुक नहीँ सकता । क्या है ये तुफान, इन्द्र का वज्र आ जाये तो भी झुक नहीँ सकता ॥ मत करो झुठी कल्पना की मे डर जाउँगा । श्री राम... Read More
झासी की रानी Unknown 11:14 PM Add Comment Edit अकेले दम पर अंग्रेजो को नाको चने चबवाने वाली झासी की रानी की पुण्यतिथि (१८ जून) है, जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई के लिए एक रौशनी द... Read More
म्हारे जितां धरती लेग्या Unknown 11:14 PM Add Comment Edit धरती रा थाम्भा कद धसकै, उल्ट्यो आभो कद आसी ? माता अब तो साँझ पड़ी है, रुस्यो दिन कद आसी ? हात्यां रा होदा कद टूटे, घोड़ा न कद धमकास्यूं । ... Read More
मुरदों का ढेर लगा दूं मैं¸ अरि–सिंहासन थहरा दूं मैं। राणा मुझको आज्ञा दे दे शोणित सागर लहरा दूं मैं Unknown 11:03 PM Add Comment Edit निर्बल बकरों से बाघ लड़े¸ भिड़ गये सिंह मृग–छौनों से। घोड़े गिर पड़े गिरे हाथी¸ पैदल बिछ गये बिछौनों से।।1।। हाथी से हाथी जूझ पड... Read More